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विश्व में तेजी से बढ़ रहे है बूढ़े देश

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                     विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार जापान में 100 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोगों की संख्या इस वर्ष 92000 से ज्यादा हो गई है। वैसे तो पूरी दुनिया में ही बूढ़े लोगों की बढ़ती संख्या सबके लिये चिंता बढ़ा रही है लेकिन जापान में यह एक बड़ी समस्या बनती जा रही है।           रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि विश्व के अन्य देश बुर्जुग लोगों की बढ़ती जनसंख्या जैसी चुनौती का सामना आने वाले तीस वर्ष बाद करेंगें लेकिन यह समस्या यूरोप में आज भी दरवाजे पर खड़ी है। अनुमान लगाया जा रहा है कि यूरोप में 65 वर्ष से अधिक के लोगों की संख्या 15 वर्ष से कम उम्र के लोगों की संख्या अगले वर्ष अधिक होगी। स्वास्थ्यप्रद खानपान , समुचित खेल , व्यायाम और अच्छी आदतें जीवन को स्वस्थ और दीर्घायु बनाती है।           यूरोप में बुर्जुगों की आयु तो बढ़ रही है , उसके अनुपात में बच्चों की पैदाइश  घट रही है। यह एक चिंता का विषय है। यूरोप में आबादी का अनुपात यह मांग करता है कि बूढ़ी ह...

स्क्रीन का आँखों पर दुष्प्रभाव व उपाय

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                   प्रतिवर्ष अक्टूबर के दूसरे गुरूवार को ‘‘विश्व दृष्टि दिवस‘‘ मनाया जाता है। नेत्रज्योति से सम्बन्धित समस्याओं , सावधानियों की चर्चा नेत्र चिकित्सक आज के दिन करते है। जोधपुर के मथुरादास माथुर अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अरविन्द चौहान ने बताया कि अस्पताल की ओपीडी में 25 प्रतिशत रोगी 6 वर्ष से 16 वर्ष तक के बच्चे आते है। जिनको कम दिखाई देने और सिरदर्द की समस्या रहती है। जाँच करने पर पता चला है कि इनमें अधिकांश की दूर की नजर कमजोर हो गई है। आने वाले हर बच्चे को मजबूरन चश्मा का नंबर देना पड़ता है और जो पहले से चश्मा लगा रहे है उनके नम्बर बढ़ रहे है।                     डॉक्टर चौहान ने बताया कि मोबाईल , लेपटॉप और कम्प्यूटर की स्क्रीन पर अधिक समय बिताने के कारण बच्चों को यह समस्या हो रही है , मोबाईल व कम्प्यूटर के लगातार संपर्क में रहने से नीली रोशनी आँखों को नुकसान पहुँचाती है। यह नीली रोशनी आँखां के रेटिना में प्रव...

अमृत फल : आंवला

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                           आयुर्वेद में आंवला को अमृत एवं दिव्य फल कहा जाता है। दीपावली के बाद कार्तिक सुदी नवमी को आंवला नवमी का व्रत रखकर महिलायें आंवले के पेड़ की पूजा करती है और घर से खाना बनाकर ले जाते है व आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर भोजन करते है। कहा जाता है कि आंवला भगवान विष्णु का सबसे प्रिय फल है और आंवले के फल में सभी देवी-देवता निवास करते है। ऐसा माना जाता है कि आवंला नवमीं से लेकर पूर्णिमा तक भगवान विष्णु आंवले के पेड़ में निवास करते है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने से संतान की प्राप्ति होती है और 108 बार इसकी परिक्रमा करने से सभी मनोकामनाएँ पूरी होती है। आंवला नवमी पर किया गया दान , पुण्य कई गुना अधिक लाभ देता है।                     आयुर्वेद में आंवला आयु बढ़ाने वाला व अमृत के समान माना गया है। आंवले का चूर्ण चीनी के साथ मिलाकर खाने या पीनी के साथ मिलाकर पीने से एसिडिटी मिटती है तथा पाचन संबंध...

रेगिस्तान में कृषि पर्यटन (एग्रोटूरिज्म) पार्ट-6

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                           अपने खेत व ढाणी में कृषि पर्यटन उद्योग तीव्रगति से विकसित करने एवं पीढ़ियों तक निर्बाध गति से चलता रहे , विकसित होते रहें इसके तरीकों के बारे में विस्तार से चर्चा होगी।                     हर किसान को अपना व्यवसाय बढ़ाने के लिये अपना मोबाईल नंबर , ईमेल तथा वेबसाईट की जानकारी केटलॉग या विजिटिंग कार्ड के द्वारा पर्यटकों को अवश्य दें। जो भी पर्यटक आपके यहाँ से माल या सेवाएँ खरीदते है उनसे डिजीटल पेमेंट स्वीकार करने की सुविधा हो। अंतराष्ट्रीय पेमेंट कार्ड भी आपके पास होना चाहिये। आपके परिवार में बच्चों को इंटरनेट , वेबसाईट व ऑनलाईन मार्केटिंग की पूरी जानकारी जरूर करावें। यह ज्ञान आपके व्यापार को हजारों गुना बढ़ायेगा। जो भी सामान पर्यटक आपसे खरीदता है। उसको उनके दिये हुये पते पर डाक या कूरियर द्वारा भेजने की सारी सुविधा प्रोवाईड करानी चाहिये। उन वस्तुओं का पैकिंग फारर्वडिंग और कूरियर चार्जेज व...

रेगिस्तान में कृषि पर्यटन (एग्रोटूरिज्म) पार्ट-5

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                           रेगिस्तान में कृषि पर्यटन बहुत बड़ा सेक्टर है। प्रतिवर्ष कृषि पर्यटन से करोड़ों डॉलर की आय प्राप्त होगी। जिसमें किसान , टैक्सी वाले , होटल वाले , टूर गाईड , रेस्टोरेन्ट वाले , हस्तकला की वस्तुऐं बनाने वाले व राज्य व केन्द्र सरकार को इस आय में से अपना-अपना हिस्सा मिलेगा। कृषि पर्यटन से यदि प्रत्येक पर्यटन का दो या तीन नाईट का ठहराव भी बढ़ जाता है तो यह रेगिस्तान के विकास में बहुत सहायक होगा। किसानों का जीवनस्तर ऊपर उठेगा। उनके पढ़े-लिखे बच्चों का विदेशी पर्यटकों के साथ इंटरेक्शन धीरे-धीरे नजदीकियाँ लायेगा। एक दूसरे की संस्कृति को समझने में मददगार होगा। अधिक मित्रता होने पर , यह मित्रता अच्छे परिणाम लायेगी। कृषि पर्यटन द्वारा कृषि क्षेत्र का निर्यात बढ़ेगा। जिससे किसान की आय में बढ़ोतरी होगी।          हर ढाणी में एक छोटा मंदिर या चबूतरा होता है। चबूतरे पर किसान के ईष्ट देव की मूर्ती होती है। सवेरे व सांय संध्याकाल में घण्टे घड़ियाल को साथ सस्वर आरती...

रेगिस्तान में कृषि पर्यटन (एग्रोटूरिज्म) पार्ट-4

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                 अपनी ढाणी और खेत में पर्यावरण के अनुकूल ही सारे साधन होने चाहिये। घर में बैलों की जोड़ी और उससे चलने वाले हल आदि औजारों के साथ-साथ सुविधा के लिये आधुनिक ट्रेक्टर भी रख सकते है। खेत के दृश्यों को देखकर विदेशी मेहमान प्रसन्नचित हो जाएंगें।           रोशनी के लिये और टांके से पानी निकालने लिये सौर ऊर्जा संयंत्र काम में लिये जाते है , जो इको फ्रेण्डली होते है। खाना पकाने व रोशनी के लिये गोबर गैस के प्लांट भी कई लोग अपनी ढाणी में लगाते है। इससे दोहरा फायदा होता है। गाय के गोबर का उत्तम खाद बन जाता है तथा इसकी गैस एक ऊर्जा का स्रोत भी होता है। मिट्टी की ईटों और स्थानीय वनस्पतियों की छत के मकान व चित्रकारीयुक्त घर देखना उनको बहुत पसंद है। पानी का भण्डारण , अन्न का भण्डारण और पशुधन के लिये चारे व पानी का भण्डारण करने की परंपरागत विधियों को वे गंभीरता से देखते है।           ढाणी की शुद्ध हवा , खुली धूप और रोशनी , पौष्टिक एवं ताजा भोजन , भरपूर मात्रा में दूध , दही , घी...

रेगिस्तान में कृषि पर्यटन (एग्रोटूरिज्म) पार्ट-3

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                      कृषि पर्यटन रेगिस्तान के लिये आय का बहुत बड़ा स्रोत बन सकता है। कई देशों में इस प्रकार के प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक चल रहे है। किसान का खेत और ढाणी को देखने के लिये विदेशी मेहमान लालायित रहते है। ग्रामीण क्षेत्र के दैनिक जीवन , रहन-सहन , पहनावा , रीति-रीवाज , उत्सव और त्यौहार , खेती में काम करने के तरीके आदि को नजदीक से देखना पर्यटक पसंद करते है।           पर्यटकों का आकर्षण नियमित बना रहे , इसलिये किसान को भी तैयारी करनी पड़ेगी। वैसे तो उसका वास्तविक जीवन देखने व समझने लायक होता है , लेकिन उसमें कुछ बिन्दुओं को जोड़ लिया जाये तो और अधिक आकर्षक बन सकता है। रेगिस्तान में दो तरह के किसान है , एक तो ऐसे किसान है जिनके पास सिंचाई का कोई साधन उपलब्ध नहीं है , दूसरे वे किसान जिनके पास सिंचाई के लिये कुआँ , ट्यूबवेल , नहर आदि है। दोनों किसानों की फसलों में और खेती के तरीको में काफी अंतर होता है।               ...

रेगिस्तान में कृषि पर्यटन (एग्रोटूरिज्म) पार्ट-2

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                      राजस्थान में बड़ी संख्या में पूरे विश्व के पर्यटक आते रहते है। राजस्थान सरकार ने पर्यटन व्यवसाय को उद्योग का दर्जा देकर बहुत ही सराहनीय कार्य किया है। पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने के लिये राज्य सरकार दूसरे उद्योगों की तरह ऋण और अनुदान देने की नीतियों की घोषणा कर रखी है। राजस्थान में पर्यटन उद्योग को स्थापित करने के लिये बड़े औद्योगिक घराने आ गये है। होटल इण्डस्ट्री , टूर ऑपरेटर्स और इंवेट मैनेजर्स इस व्यवसाय में लगकर बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहे है।                     पश्चिमी राजस्थान के किसान भी पर्यटन इण्डस्ट्री में जुड़कर देश के लिये बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा अर्जित कर सकते है। विदेश से आने वाले मेहमान , परंपरागत टूरिस्ट पांइट्स के अतिरिक्त भी बहुत कुछ देखना चाहते है। भारत एक कृषि प्रधान देश है। यहाँ के 70 प्रतिशत लोगों की आजीविका कृषि पर आधारित है। भारत की कृषि इस समय नवीन वैज्ञानिक तकनीक के साथ-साथ पर...

रेगिस्तान में कृषि पर्यटन (एग्रोटूरिज्म)

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                      पूरे विश्व के लोग भारत भ्रमण के लिये नियमित रूप से आते रहते है। विशेषकर राजस्थान में पुराने राजपुताना के गढ़ , किले , झालरें , पुरातन मंदिर आदि देखने के लिये बार-बार आते है। सैकड़ों साल पुरानी यहाँ की स्थापत्य कला देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते है। यहाँ के लोगों की वेशभूषा , रहन-सहन , खानपान , रीति-रीवाज आदि को विदेशी लोग बड़े उत्साह के साथ समझने की कोशिश करते है। पश्चिमी राजस्थान की हस्तकला , कुटीर उद्योग उनके मन को भाता है। सितम्बर से लेकर मार्च तक यहाँ की होटलें और पर्यटक स्थल विदेशी मेहमानों से भरे रहते है। पूरे राजस्थान में वन्यजीवों का शिकार करना कानूनी अपराध है। यहाँ पर गाँवों में हिरण , चिंकारा और नीलगाय आदि विचरण करते रहते है। पालतू पशु , गाय , भेड़ , बकरी व ऊँटों के झुण्ड लेकर चरवाहे चराने के लिये ले जाते है। इतनी बड़ी संख्या में पशुधन को एक जगह देखना उनके लिये आश्चर्य की बात है। दिनोंदिन पर्यटन उद्योग बढ़ता जा रहा है। राजस्थान में पर्यटन उद्योग आय का काफी बड़ा स्रोत है।       ...