निंद्रा रानी

               


 मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिये भरपूर नींद लेना अत्यंत आवश्यक है। जिन लोगों को पर्याप्त नींद नहीं आती उनको कई बीमारियाँ घेर लेती है। प्रतिदिन कम से कम 7-9 घण्टे तक नींद लेना आवश्यक है। कम नींद की वजह से हार्ट अटैक का भी खतरा बढ़ जाता है।

        हृदय रोग विशेषज्ञों का मानना है कि गहरी नींद पूरी नहीं होना भी हार्ट अटैक का कारण बनता है। रक्तचाप, सीने में दर्द, अनियमित धड़कन, कॉलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ना आदि समस्याऐं कम नींद के कारण होती है। कम नींद लेने वाले व्यक्तियों में मानसिक तनाव रहता है। निंद्रा की कमी के कारण ही हार्ट अटैक, मोटापा, किडनी रोग, डायबिटीज और दिमाग को नुकसान आदि बीमारियाँ हो जाती है।

        अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी ने प्रकाशित किया कि कम नींद लेने से हार्ट अटैक आने की संभावना 32 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। अनिंद्रा की बीमारी मनुष्यों में आजकल तीव्रगति से बढ़ रही है। संतुलित खानपान की कमी, नियमित श्रम की कमी और मानसिक सोच में बदलाव के कारण नींद की कमी हो रही है। पारिवारिक सदस्यों के आपसी तालमेल और प्रत्येक की दिनचर्या में विभिन्नता होने के कारण भी सभी पारिवारिक सदस्यों में स्वस्थ निंद्रा की कमी रहती है। अनिंद्रा के कारण पाचन संस्थान पर अतिशीघ्र असर पड़ता है। पाचन संस्थान यदि स्वस्थ नहीं है तो शरीर के सारे अंग अस्वस्थ ही रहते है। भरपूर नींद लेना स्वस्थ जीवन के लिये अत्यंत आवश्यक है।

        सोने के कम से कम तीन घण्टे पूर्व भोजन कर लेना चाहिये। रात्रि भोजन करने के बाद कम से कम आधा घण्टा टहलना जरूरी है। सोने से पूर्व आधा घण्टा पहले मोबाईल फोन, टेलीविजन और लेपटॉप की स्क्रीन बंद कर देनी चाहिये। सोने से पूर्व प्रतिदिन के किये गये कार्यो का सिंहावलोकन अपने मन में अवश्य करें। सोते समय एक गिलास गर्म दूध का सेवन करना चाहिये। दस बजे के पहले-पहले ही सोने का नियम बना लें ताकि आप सवेरे चार-पाँच बजे तक नींद पूरी करके उठ सकें।

        परिवार में व मित्रों में अधिकतर विवाद नींद पूरी नहीं होने के कारण ही होते है। बेचेनी होना, काम में मन नहीं लगना, एकाग्रता समाप्त होना, भूलने की आदत पड़ना, समय पूर्व बाल सफेद होना, स्फूर्ति समाप्त होना, बार-बार भ्रमित होना, नेत्रज्योति जल्दी खराब होना, शरीर में हर समय थकावट महसूस होना आदि अनिद्रा या अल्प निद्रा के ही परिणाम होते है। जो व्यक्ति भरपूर स्वस्थ नींद लेता है उसकी मानसिकता सदैव सकारात्त्मक रहती है। बड़ी से बड़ी समस्या का हल निकालने में उसको समय नहीं लगता है। अपने-अपने अनुभवों के अनुसार नींद को बुलाने के तरीके विकसित कर लेना चाहिये। कई लोग सोने से पहले दस-पन्द्रह मिनट तक पुस्तक पढ़ते है, कुछ लोग मन ही मन ईश्वर का धन्यवाद करते है। कुछ लोग अपने शरीर की हल्के हाथों से सूखी मालिश करते है ताकि उन्हें गहरी नींद आ सके। प्रातःकाल नियमित जल्दी उठने के भी रात को समय पर नींद आ जाती है।

        स्वस्थ नींद लेने वालों की स्मरण शक्ति तेज रहती है। अच्छी नींद से मानसिक स्वास्थ्य ठीक रहता है। तनाव, चिंता और डिप्रेशन नहीं होता है। अच्छी नींद से वजन और ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है। शरीर में बीमारियों से लड़ने की क्षमता अर्थात् इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने के लिये अच्छी नींद आवश्यक होती है। भरपूर नींद लेने वाले व्यक्ति हमेशा अपने आप को तरोताजा महसूस करते है तथा उनकी कहने और सुनने की कम्यूनिकेशन स्किल में सुधार होता है। अच्छी नींद लेने वालों के आत्मविश्वास का स्तर काफी ऊँचा रहता है जिससे जीवन के लक्ष्यों की प्राप्ति आराम से होती है।

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